#Gazal by Pradeep Mani Tiwari

ग़ज़ल★★★★★
ये रावण जला है ये जलता रहेगा।
सियासी ये ड्रामा भी चलता रहेगा।
जलाते भी कैसे सुबह के वक्त ही
दिखे फिर से रावण ये छलता रहेगा।
गली औ मोहल्लो में रावण खड़े हैं
लुटा जो वही हाँथ मलता रहेगा ।
मिले है सियासत से राशन औ पानी
न हो आख़िरी दिन ये टलता रहेगा।
उगा है जो सूरज दरिन्दे बढ़े हैं
उमर है बड़ी दिन ये ढलता रहेगा।
दिनो दिन बढ़े कद अमर हो रहा “ध्रुव”
सियासत के साये मे पलता रहेगा।
शायर प्रदीप ध्रुवभोपाली

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