#Gazal by Pradeep Mani Tiwari

हुश्न का दीदार हो जब आसमां से बात हो।
आशिकी में खो गये शामो सुबह या रात हो।
कीजिये दिल से दुआ परवान हो ये इश्क भी
आशिकाना वास्ते दिल मानिए सौगात हो।
इश्क है जायज इबादत ये ख़ुदा की जानिए
इश्क की रहवरगरी हो लाजिमी आघात हो।
ये नहीं आसां मोहब्बत सब कहें ग़ुस्ताख़ियां
मिल गयी सच्ची मोहब्बत या ख़ुदा सौगात हो।
आदमी है वो फरिश्ता जो दिलों को जोड़ दे
वास्ते उसके दुआओ की भरी बरसात हो।
इश्क में डालें ख़लल नादान”ध्रुव” शैतान हैं
कीजिए रहवरगरी इंसानियत की बात हो।

★★★★★★★★★★★★
शायर प्रदीप ध्रुवभोपाली

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