#Gazal by Pradeep Mani Tiwari

बह्र्/अर्कान-122×4,फऊलुन×4
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खुशी मिल गयी आग के भाग जागे।
ग़ज़ल गीत वाले सभी राग जागे।
किया जो मशक्कत बरस से उन्होंने
ये सच मानिए अब मेरे आग जागे।
दुआ हम सभी के लिए आज करते
किसी ज़िन्दगी के अहोभाग जागे।
किसी को ख़ुदाई मिले जानिए तब
ख़ुदा की इबादत से वैराग जागे।
दिखी जब तरक्की ये रहजन जले तब
हुआ जबकि सहरा कई काग जागे।
छुपे जो फरेबी रहे अब तलक
“ध्रुव”
दिखें आदमी हैं मगर नाग जागे ।

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शायर प्रदीप ध्रुवभोपाली

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