#Gazal by Pradeep Mani Tiwari

दिवाली का मौसम चला आ रहा है।
फटाके चलें तो मज़ा आ रहा है।
उजाला की नेमत मिलेगी सभी को
उजाला चला खांमखां आ रहा है।
चलेंगे फटाके लड़ी भी जलेंगी
मगर वो ग़रीबा बुझा आ रहा है।
ग़रीबा के घर में फ़कीरी का
आलम
अमीरों का रथ वो सज़ा आ रहा है।
मज़ूरों के दिल से ज़रा पूंछिए तो
मिलें ठोकरें सिलसिला आ रहा है।
बटेंगी मिठाई गले सब मिलेंगे
ख़ुदा की कसम वो रज़ा आ रहा है।
उज़ाला सभी चाहते इस जहां में
इसी वास्ते बागवां आ रहा है।
सफाई सज़ावट से घर भी सज़ेंगे
गले सब मिलें ज़ायजा आ रहा है।
ग़रीबों के घर भी चलो हम सज़ा दें
बड़ी बात ये फ़लसफा आ रहा है।
अली और जोसेफ़ दिवाली मनायें
कहें “ध्रुव” वो दिन इक दफ़ा आ रहा है।

★★★★★★★★★★★★
शायर प्रदीप ध्रुवभोपाली

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