Gazal by Pradeep Mani Tiwari

बह्र/अर्कान-2122×3-22
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रूह से निकले जमाने मे बिखर जाएगी।
चाँदनी है रोज़ दर वो तो निख़र जाएगी।
आम ख़ासो का सभी का है तराना इक तो
ज़िन्दगी मिल के चलें तो ये संवर जाएगी।
रात को पी ली हुए मयकश ग़मो से तुम तो
वक्त ग़ुजरेगा ख़ुमारी भी उतर जाएगी।
आज की आवोहवा कितनी नशेमन है ये
दौड़ है ये जो लगी वो भी ठहर जाएगी।
रोशनी उनपे मेहरबां जो बड़े ज़ालिम हैं
वक्त आएगा निज़ामत भी ग़ुज़र जाएगी।
ठोकरे खाए बिना कहते अक्ल आए नहीं
ज़िन्दगी है जो चली”ध्रुव”वो पसर जाएगी।

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शायर प्रदीप ध्रुवभोपाली

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