#Gazal by Pradeep Mani Tiwari

दोस्त सुन लो इस ज़मीं का का इस ज़मीं पर सब धरा रह जाएगा।
ख़ोट दुनिया से नदारद वो मिटेगा इक ख़रा रह जाएगा।
आज ही रुखसत किया ना गर बुराई इस जहां से तो सुनो
सांच का निकले ज़नाज़ा दिन भी आएगा बुरा रह जाएगा।
आदमी के वास्ते गर आदमी क़िल्लत बनेगा जान लो
सांच फिर मरहूम होगा इस जहां में सिरफिरा रह जाएगा।
ज़र बदौलत आसमां पे गर निगाहें जो टिकीं तो सांच है
ये हिदायत दीजिए क़ाफूर दौलत बस झिरा रह जाएगा।
ख़र्च आमद से ज़ियादा शान झूठी गर दिखाई तो मिटे
हाथ रह जाये कटोरा इक उसी का आसरा रह जाएगा।
आदमी जो मज़हबी औ काम आए आदमी के मानिए
बरक़ते होंगी ख़जाना माल से
“ध्रुव”वो भरा रह जाएगा।

★★★★★★★★★★★★
शायर प्रदीप ध्रुवभोपाली

One thought on “#Gazal by Pradeep Mani Tiwari

  • November 4, 2018 at 5:21 am
    Permalink

    बहुत खूबसूरत रचना आदरणीय

Leave a Reply

Your email address will not be published.