#Gazal by Pradeep Mani Tiwari

ग़ज़ल★★★★★
बह्र/अर्कान-1222×4,मफाईलुन×4
★★★★★★★★★★★★

मोहब्बत की कहानी में बहुत से मोड़ आते हैं।
भरी उलझन कभी रातें सितारे झिलमिलाते हैं।
अगर राज़ी हुआ दिलवर लगें तब पंख ख्वाबो मे
खुशी का फिर रहे आलम तराने गुनगुनाते हैं।
हमारा बेवफाई का नहीं कोई इरादा है
फ़रेबी हो गये वो ही कि हम ज़हमत उठाते हैं।
बहे जब इश्क का दरिया समंदर में मिले जा के
वफ़ादारी रहे कायम तराने वो सुनाते हैं।
जमाने हो गये यारी मगर चाहे वफ़ादारी
ग़िला शिकवा कि यारी में नहीं ये सब भुलाते हैं।
चले जब इश्क राहों पे हवाले सब किया उनके
मगर मुद्दत हुई यारा मुझे वो आजमाते हैं।
हिमायत के बहाने से शरीके ज़िन्दगी लेकिन
कभी मौका भी आ जाए नया”ध्रुव” ग़ुल खिलाते हैं।

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शायर प्रदीप ध्रुवभोपाली,भोपाल
मगसम/5102/2017/भोपाल

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