# Gazal by Pradeep Mani Tiwari

ग़ज़ल★★★★★

प्यार उससे तो बेशुमार हुआ।
गमे-इश्क दिल ये छार छार हुआ।
दोस्त जैसा वो आज है भी नहीं
फ़रेब वालो मे अब शुमार हुआ।
दिल से लानत है बार बार मुझे
फ़रेब मुझसे जो बार बार हुआ।
शोर था अच्छे दिन भी आयेंगे
गाँठ का भी गया उधार हुआ।
हमने सोचा था तरबतर होंगे
जाना अब फ़रेबियो से प्यार हुआ।
इक बहम की आँधी चली ऐसे
धूल उड़ती रही ग़ुबार हुआ।
आसमाँ से न कोई प्यार करे
छूना मुमकिन कोई न पार हुआ।
प्यार करना है तो निभाना भी
चाह दिल.से करो अपार हुआ ।
लाये उनको बसाया है दिल में
प्यार उनसे हजार बार हुआ।
राह अपनी ख़ुदी बना के चलो
मत कहो उससे “ध्रुव”गद्दार हुआ।
★★★★★★★★★★★★
शायर प्रदीप ध्रुवभोपाली, भोपाल

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