#Gazal by Pradeep Mani Tiwari

ग़ज़ल
बह्र/अर्कान-212×4-फाउलुन×4

ज़िन्दगी आजमाती है इंसान को।
वो परखती है इंसाँ के ईमान को ।

ज़िन्दगी हादसा खूबसूरत कहें
ज़िल्लतें बस दिखें यार नादान को।
आम औ ख़ास दुनिया में सब लुट रहे
लूटने कुछ चले आज भगवान को।

आसमाँ से बड़े भी मुख़ातिब हुए
जो ख़ुदा कह रहे आज धनवान को।

बुझदिलों की है बारात आयी यहाँ
ख़ौफ मे ज़िन्दगी देख अंजान को।
जान पे आ गयी हो बला इस तरह
कह रहे ख़ार है राह आसान को।
आसमानी वही जो क़िलेदार”ध्रुव”
बेख़बर ना रहम यार शैतान को।

★★★★★★★★★★★★
कवि शायर प्रदीप ध्रुवभोपाली
मो.09589349070

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