#Gazal by Pradeep Mani Tiwari

ग़ज़ल
चलाएँ सिलसिला अब तो नया भारत बनाने का।
सियासत छोड़कर ख़ुशनुम अमन पैग़ाम लाने का।
इबादत के ठिकानों में सियासत ना करें अब तो
नुमाइंदे जो मज़हव के उन्हें हक़ मान पाने का।
ग़रीबी देखकर मज़हब नहीं आती जमाने में
यतीमों को मिले हक़ दौर है रिश्ता निभाने का।
सलीबों से मिलें दस्तक़ अमीराई जहाँ देती
यतीमों की फिक़्र किसको,मगर है दौर आने का।
सियासत की तज़ुर्वाई नही ज़्यादा चलेगी अब
कहे आवाम अब तो दौर है नफ़रत भुलाने का।
शराफत में चलेगे दौर ए हालात नामुमकिन
निशानेबाज कोशिस मे,यही शक टूट जाने का।
कवि शायर प्रदीप ध्रुवभोपाली
मो.09589349070

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