#Gazal by Pradeep Mani Tiwari

ग़ज़ल★★★★★
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मंचो की वाह में आह खो गई।
मानवता जान लो राह खो गई।
भाईचारा रहा वो भी खो गया
मज़हव की आड़ मे चाह खो गई।
आना जाना चले रोज़ ही यहाँ
दिल से वाह थी वाह खो गई ।
काला दिन कौन मालूम है हमें
हो के आज़ाद वो स्याह खो गई।
नीति नियम रो रहे कान बंद”ध्रुव”
मुंसिफ़ की मौज़ दरगाह खो गई।

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शायर प्रदीप ध्रुवभोपाली,भोपाल
मो.-09589349070

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