#Gazal By Pradeep Mani Tiwari

रुखसत जो हो कर दिल में ख़ंज़र चुभा दिया।
कश्ती को पानी कम में तू ने डुबा दिया।-01
आवारा बन कर जीना मंज़ूर है नहीं,
तू आ जा अब भी वापिस ये क्या सिला दिया।-02
घुट घुट के जीते हैं हम जब से ज़ुदा हुए,
देखे थे ख़ाब,ख़ाक़ में वो सब मिला दिया।-03

कसमें जो ख़ाई हमने अब भूल ही गये,
वादो को भूले अब ये ग़ुल क्या खिला दिया।-04

अरमां जो पाले दिल में वो ख़ाब ही रहे,
फेहरिस्त लंबी वो सब तुमने भुला दिया।-05

माँगी थी कैद रुखसत तुमने हमें किया,
पहले से दिल जला था फिर क्यों जला दिया।-06

★★★★★★★★★★★★
कवि शायर प्रदीप ध्रुवभोपाली
मो.09589349070

Leave a Reply

Your email address will not be published.