#Gazal By Pradeep Mani Tiwari

ज़ंग-ए-आज़ादी में हिन्दुस्तानियत थी बस
आज़ाद हो कर हिन्दू औ मुसलमां हो गये।

बरसों बरस के रिश्ते तार तार हो गये,
सियासत की चालों ने हमें मोहरा बना दिया।

राखी सिसक के रोई जब रिश्ते हुए ख़त्म,
हैवानियत ने रिश्तों को दागदार कर दिया।

हैवानियत के बीच कुछ इंसानियत मिली,
तब दिल ये कह उठा ज़िन्दा अभी ज़मीर।

इंसान और इंसानियत ज़ागीर खुदा की,
नहीं आदमी की हैंसियत इनको खरीद ले।

★★★★★★★★★★★★
प्रदीपमणि तिवारी/ध्रुवभोपाली

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