#Gazal by Pradeep Mani Tiwari

ग़ज़ल★

रिश्ता सभालिए ये काम के बड़े।
लेकिन सभी कहें ये नाम के बड़े।
औकात जानिये उनमे अदब नहीं
वो तो मँहज हुए सब दाम के बड़े।
आता उन्हें सभी कुछ जो भी काम हो
करना उन्हें जो आये राम के बड़े।
हद से अधिक गिरे वो गिरते जा रहे
सच ये सभी कहें बदनाम के बड़े।

होता नहीं कभी कुछ आम ख़ास ये
मिटते रहें भले आराम के बड़े।
दिखते नही भले कुछ कर भी पा रहे
लेकिन “ध्रुव”सच हैं वो अंज़ाम के बड़े।
★★★★★★★★★★★★
शायर प्रदीप ध्रुवभोपाली, भोपाल
म.प्र.दिनाँक-19/09/2018
मो.09589349070

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