#Gazal by Pradeep Mani Tiwari

ग़ज़ल
आदमीयत को लिये कोई दिवाना आ गया।
हर बसर मिल कर चले अब वो जमाना आ गया।
आरज़ू दिल में रखें अब हो परस्ती वतन की
फर्ज़ भी अपने वतन पे वो निभाना आ गया।
हिन्द है ज़न्नत ज़मीं का हर बसर को है पता
आ गये हम इस ज़मीं पे आव दाना आ गया।
फर्ज़ है इंसानियत मज़हब बड़ा इससे नहीं
दिल मिले ईदो-दिवाली भी मनाना आ गया।
आसमानी इल्म जिसको ज़िन्दगी मे जब हुआ
बाँटना खुशियाँ सभी को फिर हँसाना आ गया।
जंग़ भी ज़ायज तभी जब आखिरी हो दाँव ये
मात शह कब है ज़रूरी आजमाना आ गया।
ओजकवि प्रदीप ध्रुवभोपाली
भोपाल,म.प्र.दि.
मो.09589349070

Leave a Reply

Your email address will not be published.