#Gazal By Pramod Pundir Pyasa

दाग दिल की रखे निहां करके।
अश्क़ पीते रहे छुपा कर के।

अर्ज ता-उम्र की बुतों के लिए।
थक गए हम तो इल्तजा करके।।

आबरू ख़ाक में मिला उनको।
शर्म आती नहीं हया करके ।।

ए खुदा उम्र भी यह दे दे उन्हें।
हमको जाना है हक़ अदा कर के।।

वक्त आखिर है चारागर से कहो।
क्या मिला दर्द की दवा करके।।

उनकी उल्फ़त ने पिलाई जो शराब।
रख दिया प्यासा बे-जुबां करके।।

 

प्रमोद प्यासा
हाथरस अलीगढ़

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