#Gazal by Prashant Dev Mishra

हो के खाना खराब पीता है।
किस कदर बेहिसाब पीता है।

ताक पे रख के तेरे वादे को,
तेरा आशिक़ शराब पीता है।

वो जिसे तू शराब कहती है,
उसमें क्या-क्या अजाब पीता है

जाम के बाद सिगरेटें दो-दो
फ़िर मुसलसल शराब पीता है।

तेरे होने से उसपे है रंगत
चांद तेरा शबाब पीता है।

मेरे जज़्बात की तपिश को फिऱ,
सुनता हूं आफ़ताब पीता है।

तू कभी गुलशनों में मत जाना,
हुस्न तेरा गुलाब पीता है।

हमसे होकर के जो बह रही है ये,
इसको सब पंजाब पीता है।

सुल्फा,गांजा,चरस के ठंडी भांग
सबको पी के शराब पीता है।

देव जो तूने पी वोही नवाब,
औऱ आली जनाब पीता है।

प्रशान्त देव

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