#Gazal by Raj Shukla Nmr

साथ जबसे हमें आपका मिल  गया

यूँ लगा इक नया आसमा मिल गया

 

आशिकी  के  लिए मिल गया  हमसफर

बंदगी   के   लिए   एक  खुदा मिल गया

 

धड़कनों  ने  सुनी धड़कनों की   सदा

और विश्वास का सिलसिला मिल गया

 

आप न थे तो तन्हाई का गम ही  था

आप आये तो सारा जहां मिल  गया

 

जिंदगी  को  मिली  इक नई  जिंदगी

प्यार को प्यार का आसरा मिल गया

 

इक   अकेले   भटकते  हुये   राही   को

साथ चलने को ज्यो काफिली मिल गया

 

बन के आया तू जब जीवन साथी मेरा

तब से जीने का अंदाज सा मिल  गया

 

हाँथ    में    हाँथ   ऐसे   मिले   राज  कि

अपनी मंजिल का जैसे निशां मिल  गया

 

राज शुक्ल “नम्र”

 

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