#Gazal by Raj Shukla Nmr

मुझे प्यार का आसरा दे गये हो

बहुत  खूबसूरत  दगा  दे गये हो

 

बहारें  तो  माँगीं   न   थीं हमने  तुमसे

मगर दोस्त तुम तो खिंजा दे  गये   हो

 

सितम एक दो कोई सहे भी  पै  तुम  तो

जुल्मों का एक सिलसिला दे   गये    हो

 

मुझे मार डाला मै जिंदा हूँ फिर भी

ये  कैसी घुटन का समां दे गये   हो

 

मुहब्बत  कोई  जुर्म तो है नहीं फिर

मुझे  क्यो  जहर  ए जफा दे गये हो

 

दिया हमने दिल राज तो बदले  उसके

मुझे   दर्द   का   कारवाँ   दे   गये   हो

 

राज शुक्ल “नम्र”

 

 

 

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