#Gazal by Raj Shukla Nmr

तुम्हारी वफा भी हकीकत न निकली

तुम्हारे भी दिल में मुहब्बत न निकली

 

मैं समझा था तुमको जहां से अलग सा

तुममे भी लेकिन शराफत न निकली

 

दगा दे गये तुम भी सूरत के बल पर

तुम्हारी भी सूरत सी सीरत न निकली

 

तुम भी समझ प्यार को खेल खेले

ह्रदय मे तुम्हारे भी चाहत न निकली

 

उल्फत को दौलत से तुमने भी तौला

तुममे भी उल्फत की दौलत न निकली

 

तुम भी राज रुख नकली ले कर के आये

तुम्हारी भी तो पाक नीयत न निकली

 

राज शुक्ल “नम्र”

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