#Gazal by Raj Sukla Nrm

तुकांत पर मेरी ये कोशिश
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क्या से क्या हो गये देखते देखते
नाखुदा हो गये देखते देखते

या खुदा तेरी तिरछी नजर क्या हुई
हम फना हो गये देखते देखते

वो किसी गैर के पहलू ए खास में
आशना हो गये देखते देखते

इश्क करना तो अपराध न था क्यों फिर
वा सजा हो गये देखते देखते

वाह गजब की दिखा कर अदाकारी वो
तो खुदा हो गये देखते देखते

और हम कल तलक राज मंजिल थे अब
रास्ता हो गये देखते देखते

राज शुक्ल “नम्र”

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