#Gazal by Rajesh Gupta Badal

रदीफ़ = किया है
क्वाफ़ी= आरा पारा तारा सारा
वज़्न = 122 122 122 122

मुफलिसी में हमने गुज़ारा किया है,
तभी तो दुःखों ने किनारा किया है।

हारे नहीं हैं थके हम कहां अभी,
राह बाकी बहुत नज़ारा किया है।

जिंदगी तुझे क्या पता दुस्वारियां,
तेरे लिए क्या नहीं गवारा किया है।

मिली जो नहीं दो वक्त की रोटियां,
हालात ने फिर भी शरारा किया है।

कभी रहम ओ करम पर थे हमारे,
उसी ने कहां फिर सहारा किया है।

जल रहा फ़िक्र में रात दिन भूख की,
मेहनत को मिरी हज़ारा किया है।

दम कहां ईमान की बात में ‘बादल’
भूख ने लो फिर से इशारा किया है।

राजेश गुप्ता’बादल’
मुरैना म.प्र.

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