#Gazal by Rajesh Kamal

ज़रा देखो घिर गया है बादलों से आसमान

बरसेंगे लहक के तो जी जाएगा ये किसान

खाद-बीज-बुवाई का बड़ा कर्ज है पहले से

लील जाएगी उसको मोटे बनिये की दुकान

हाथ पीले करने हैं इस कार्तिक में कन्या के

बेटे की पढ़ाई है और बनाना है इक मकान

बीवी बेवा-सी लगती है बेरंग चीथड़ों में

बाप के दमे की दवा का करना है इंतजाम

जमीन गिरवी पड़ी है बैंक में परसाल से ही

कहा नहीं जा सकता कब हो जाए  नीलाम

घनश्याम ही रख सकते हैं उसकी लाज अब

वरना कैसे धो पाएगा वो लगे हुए इल्जाम

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