#Gazal By Ramesh Raj

रुक्न के अनुसार हू-ब-हू, बिना मात्रा गिराए एक ग़ज़ल-
बहर-फायलातुन फायलातुन फायलुन
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आप तो अहले-शरारत हैं बहुत
आपसे हमको शिकायत हैं बहुत |

हैं बिंधे मन-प्राण अपने किन्तु हम
ज़िन्दगी अब भी सलामत हैं बहुत |

रूह घायल पी हलाहल जी विवश
प्यार में इस बार आहत हैं बहुत |

फूल-सागर मेघ-सा मन है न अब
प्राण पै दुःख-मान, आफत हैं बहुत |

आग-सी कुछ तेग-सी कुछ तीर-सम
आप में चितचोर आदत हैं बहुत |
+रमेशराज

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