#Gazal by Ramesh Raj

हाइकु विन्यास में एक ग़ज़ल-
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मन है जैसे / पल-पल संदल / ख़ामोशी छोड़ो
यहाँ प्रीति में / अब हम पागल / ख़ामोशी छोड़ो |

क्यों बन बैठीं / सघन मौन-लय / बातें आँखों की
इधर प्राण हैं / अविरल चंचल / ख़ामोशी छोड़ो |

आया सावन / बादल रिमझिम / बूँदों को लाये
आज हवा है / मदमय शीतल / ख़ामोशी छोड़ो |

हँस के बोलो / तज के अनबन / ग़ुस्सा ऐसा क्यों
और करोगे / कब तक यूँ छल / ख़ामोशी छोड़ो |

मर जायेंगे / अगर नहीं तुम / बोलोगी प्यारी
इन सांसों का / जब तुम सम्बल / ख़ामोशी छोड़ो |
+रमेशराज
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+रमेशराज, 15/ 109, ईसा नगर, अलीगढ़-202001
Mo.-9634551630

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