#Gazal By Ramesh Raj

रुक्न के अनुसार हू-ब-हू बिना मात्रा गिराए
एक ग़ज़ल
।। बहर-फायलातुन मफ़ायलुन फैलुन ।।
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चाँदनी खुशगवार अब तो मिल
मौसमे-दिल निहार अब तो मिल |

फूल तू, बन न ख़ार अब तो मिल
लाज को कुछ उतार अब तो मिल |

हो गया मन सितार अब तो मिल
प्यार की सुन पुकार अब तो मिल |

प्राण का बन करार अब तो मिल
पीर में कर सुधार अब तो मिल |

राज से रह न दूर, लगते प्रिय
चार भी दिन हजार अब तो मिल |
+रमेशराज

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