#Gazal by Rifat Shaheen

बैठे हैं हम तो राह में लेकर चरागे इश्क़

है इंतज़ार आये चरागा करे कोई

करनी है उनसे मुझको बहुत सी शिकायते

ये बात जाके उनको बताया करे कोई

तन्हा गुज़र न जाये कहीँ आज फिर ये शब

मिलने को हमसे शाम से आया करे कोई

ये सर्द सर्द रातें ये तन्हाई ,ये अलम

मुझको जला मुझी में उजाला करे कोई

दरिया समेट लाऊं रिफ़त उसके वास्ते

बस इल्तिजा तो प्यास की प्यास करे कोई

 

Leave a Reply

Your email address will not be published.