#Gazal by Rifat Shaheen

फूलों के सीने में नश्तर देखें हैं

हमने कुछ ऐसे भी मंज़र देखें हैं

रातों के दरवेश रहें हैं हम भी तो

जाने कितने मस्तक़लन्दर देखें हैं

सहराओं की ख़ाक भी हमने छानी है

दरिया,पानी,प्यास समंदर देखें हैं

हमनें क़ब्र बना रक्खा है दिल को ही

कितने लाशे अपने अंदर देखें हैं

रहजन भी शर्मिंदा रिफ़अत जिनसे हैं

राहों में ऐसे भी रहबर देखें हैं

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