#Gazal by Rifat Shaheen

आईने की अना से डरते हैं

हम भी अपनी सना से डरते हैं

हमको ख़ौफ़ ए जुनू न दिखलाएं

जाइये हम बला से डरते हैं

अपनी तूफ़ाँ से आशनाई है

आप काली घटा से डरते हैं

इन्तिहा ए गमे महब्बत क्या

इश्क़ की इब्तिदा से डरते हैं

एक कूफ़ा है और यज़ीदी दौर

ऐसी करबोबला से डरते हैं

ज़िन्दगी हर कदम है मौत रिफ़त

लोग नाहक़ क़ज़ा से डरते हैं

 

रिफ़अत शाहीन

One thought on “#Gazal by Rifat Shaheen

  • September 24, 2018 at 9:53 am
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    Bahut hi khoobSutat ghazal.

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