#Gazal By Rifat Shaheen

नून खुशबू है लाम खुशबू है
हाँ तिरा हर पयाम खुशबू है

हमसे फिर हमकलाम खुशबू है

हमसे  फिर हमकलाम खुशबू है

फिर कोई नौग़ज़ाल गुज़रा है
मुश्क की बाम बाम खुशबू है
ज़ुल्फ़ बिखरा के कह रहा है कोई
आज फिर तेरे नाम खुशबू है
होश उड़ जाए है ख़ुदा की क़सम
इश्क़ इक बेलगाम खुशबू है
वो है अत्तार दीदावर मशहूर
उसके अश्क़ों का नाम खुशबू है

खुशबु है आज की रदीफ़ रिफ़त
आज महफ़िल में आम खुशबू है

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