#Gazal by Rifat Shaheen

उनके लिये जो मुंहासों की वजह से परेशान है

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चढ़ता शबाब और जवानी के निशां हैं

नाहक़ आप कील मुँहासों से ख़फ़ा हैं

देता है खुदा जिसको भी भरपूर जवानी

उस खुशनसीब को ही मिली है ये निशानी

गालों पे जब ये निकले हसीनों ये समझ लो

बचपन से कह रही है जवानी के खिसक लो

अब अ गया शबाब मुँहासों की शक्ल में

सौगात इनको समझो और लाओ अक़्ल में

खुद पर करो गुरुर कहो हम भी जवाँ हैं

नाहक़ आप कील मुँहासों से ख़फ़ा हैं

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One thought on “#Gazal by Rifat Shaheen

  • May 10, 2017 at 1:18 pm
    Permalink

    वाहहह…!! बहोत खूब …!!!!!!!!!!!!!!

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