#Gazal by Rishabh Tomar Radhe

मैं इतना अच्छा हुआ कि बुरा हो गया

कि आज मैं खुद की ही नजरों से गिर गया
मैने इस तरह मोहबत की उस मलिका से
कि आज मैं उसकी ही चाहत में गिर गया
मैं इस तरह उदास बैठा हूँ अपनी छत पर
कि मैं उसकी छत पर कुछ अपना भूल गया
मोहबत में नुमाइश की क्या जरूरत है
मैं चुपचाप उसकी खताओ को भूल गया
 परेशान होकर उनकी गजले में खो गया
कि मोहबत में ‘ऋषभ’ दुनिया से गुजर गया
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