#Gazal by Rishabh Tomar

तुम्हारी इश्क के महखाने का मैं जाम बन जाऊँ
अगर तुम रति बनो साथी तो तेरा काम बन जाऊँ

सिखी के पंख सी सुंदर गुलाबों से ओ प्यारी सुन
अगर तुम जानकी सी हो तो मैं श्री राम बन जाऊँ

सुबह से शाम तक मैं तो इसी कोशिश में रहता हूँ
सुकोमल भावनाओं का तुम्हारी दाम बन जाऊँ

कृष्ण की बाँसुरी सी हो मेरी धड़कन जरा धडको
कि जिसकी धुन से मैं साथी प्यार का धाम बन जाऊँ

अंधेरी रात सी तेरी इन्ही आँख से मिलने जाँ
सुबह से दूर जाकर मैं तो ढलती शाम बन जाऊँ

मेरी कॉलेज की वो लड़की मुझे राधा सी लगती है
मेरे गिरिधर करो ऐसा कि मैं घनश्याम बन जाऊँ

तुम्हारे नाम से जिसकी सदा पहिचान हो साथी
ऋषभ वैसा कोई मैं तो यहाँ इक काम बन जाऊँ

ऋषभ तोमर

One thought on “#Gazal by Rishabh Tomar

  • November 3, 2018 at 10:56 am
    Permalink

    है नमन आपकी कलम को बहुत अच्छा

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