#Gazal by Roopesh Jain

सर झुकाना आ जाये

नज़ाकत-ए-जानाँ1 देखकर सुकून-ए-बे-कराँ2 आ जाये

चाहता हूँ बेबाक इश्क़ मिरे बे-सोज़3 ज़माना आ जाये

मुज़्मर4 तेरी अच्छाई हम-नफ़्स मुझमे, क़िस्मत मिरी

लिखे जब तारीख़े-मुहब्बत5 तो हमारा फ़साना आ जाये

माना हरहाल मुस्कुराते रहना है रिवायत-ए-जवानी6

जुस्तजू इतनी दौर-ए-ग़म7 में रिश्ते निभाना आ जाये

बे-लिहाज़8 बस्ती में हो चला मतलब-आश्ना9 हर कोई

भरोसा रखने से बेहतर दर्द-ए-बेकसी10 भुलाना आ जाये

इबादत-गुज़ार11 हूँ मिरे मालिक़ इनायत बख्शते रहना

दुआ ‘राहत’ नाम तिरा आये तो सर झुकाना आ जाये

डॉ. रूपेश जैन ‘राहत’

ज्ञानबाग़ कॉलोनी, हैदराबाद

२१/०७/२०१८

शब्दार्थ:

१ नज़ाकत-ए-जानाँ -: प्रिय की सादगी

२ सुकून-ए-बे-कराँ -:  अशांत की शांति/ असीम शांति

३ बे-सोज़ -: जिसमें जलन न हो

४ मुज़्मर -: छुपी हुई

५ तारीख़े-मुहब्बत -: प्रेम का इतिहास

६ रिवायत-ए-जवानी -: युवा होने के नाते, युवाओं की परंपरा

७ दौर-ए-ग़म -: पीड़ा का समय

८ बे-लिहाज़ -:बेशर्म

९ मतलब-आश्ना -: मतलब से प्यार करने वाला

१० दर्द-ए-बेकसी – असहाय होनें की पीड़ा

११ इबादत-गुज़ार – भक्त, प्रार्थना करने वाला

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