#Gazal by S K Gupta

दिल मेंं  ख्वाहिशें  मेरे भी तमाम थी

जब छोड़ गए  उम्र बाकी  तमाम थी

 

तुमको कहा  चांद तो तुम दूर हो गये

तीरगी  आसपास  बिखरी तमाम थी

 

जिंदगी ने भी मोड़  कोई नया न लिया

रफ्ता रफ्ता उम्र ही हो चुकी तमाम थी

 

दिन तो कट गए रातें कटी मुश्किलो में

अजाब यह कि तनहा  कटी तमाम थी

 

मेरा जिक्र तुमने अपनी गजल मे किया

मेरे लिए तो यही खुशफहमी तमाम थी

 

मरते वक्त शिकवे गिले सब दूर हो जाते

एक आरजू दिल मेंं  बस यही तमाम थी

 

तुमने मेरा दिल से कभी बुरा नही चाहा

खुदा की मुझ पर नेमतें बरसी तमाम थी

 

———– सत्येंद्र गुप्ता

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