# Gazal by Salil Saroj

तेरे ख़्वाब लेके मैं आंखों में

तमाम रात जागता रहता हूँ

एक तिलिस्म है तेरी बातों में

जिसके पीछे भागता रहता हूँ

जरूर बुझेगी प्यास निगाहों की

खुद से ही सदा कहता रहता हूँ

क्यूँ छू दिया मुझे इस खुमार में

बारिश में भी दहकता रहता हूँ

तेरे साँसों की धनक जो मिली

दिन रात बस महकता रहता हूँ

ये क्या किया है तुमने बता दो

हर घड़ी तुम्हें सोचता रहता हूँ – सलिल सरोज

 

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