#Gazal by Salil Saroj

हुश्न दिया तो थोड़ी नज़ाकत भी देनी थी

उमड़ते समंदर में ही आफत भी देनी थी ।।1।।

 

उसे शऊर नहीं है अपने ही कायदों का

इंसान बनाया तो थोड़ी शराफत भी देनी थी ।।2।।

 

जिसने रच दिए तुम्हारे सारे महल और मीनार

उन मजबूत हाथ को थोड़ी बगावत भी देनी थी ।।3।।

 

मुरीद को अब अपने पीर पे ही  शक है

चाहत दी थी तो थोड़ी अदावत भी देनी थी ।।4।।

 

वो बच्ची है ज़िद्द करना उसकी फिदरत है

मशीन न बन जाए तो थोड़ी रियायत भी देनी थी ।।5।।

 

हमेशा राजा ही राज करें ये कहाँ का न्याय है

कुछ वक्त तो जनता को भी सियासत देनी थी ।।6।।

 

सलिल सरोज

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