#Gazal by Salil Saroj

जम्हूरियत,मज़मा,तमाशा सब ठीक है
पर ये बताओ कि इन्सान कहाँ ठीक है
फूल-माला,धूप-अगरबत्ती सब ठीक है
पर ये बताओ कि भगवान कहाँ ठीक है
रिश्ते-नाते, चौक-चौबारे सब ठीक है
पर ये बताओ कि मकान कहाँ ठीक है
दुकान,नफा-नुकसान,मुनाफा सब ठीक है
पर ये बताओ कि ईमान कहाँ ठीक है
पैग़ाम,सच-झूठ,अच्छा-बुरा सब ठीक है
पर ये बताओ कि ज़ुबान कहाँ ठीक है
रकीब,जीत-हार,दल-बदल सब ठीक है
पर ये बताओ कि मुक़ाम कहाँ ठीक है
तंत्र-व्यवस्था,बही-खाता सब ठीक है
पर ये बताओ कि सामान कहाँ ठीक है
सरकार,राजशाही,तानाशाही सब ठीक है
पर ये बताओ कि कमान कहाँ ठीक है
दौलत,इज़्ज़त,बाह्याडम्बर सब ठीक है
पर ये बताओ कि गुमान कहाँ ठीक है

सलिल सरोज

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