#Gazal by Salil Saroj

ये हवा अभी और बदलेगी,तुम इसकी जद में मत आना

वो जितना चाहे उतना गिरे,तुम उनकी कद में मत आना

 

ये सियासत है रस्क दिखाने की इसकी बुरी आदत है

तमाशा जितना ही कर ले,तुम इनकी हद में मत आना

 

न्याय,कानून,तंत्र,व्यवस्था सब प्यादे है इस शतरंज के

जब तक तुम खेल सको कहना पर किसी बद में मत आना

 

छलने की सारी फिदरतें नवाजिश की गई हैं इस महकमे को

लालच और रिश्वत की नुमाईश होगी,तुम मद में मत आना

 

जो  कभी चाहो कौम की इज़्ज़त और नफ़ासत करना

तो नफरत से बसाई दुनिया में किसी पद में मत आना

 

सलिल सरोज

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