#Gazal by Salil Saroj

सफर में चलो तो सबको साथ लेकर चलो

सामान के अलावे कुछ कायदे लेकर चलो

 

ये मरघटों जैसी शांति गर नहीं चाहिए तो

कुछ बच्चो और बुजुर्ग को जरूर लेकर चलो

 

धूप बहुत तेज़ है सो सफर में थकन होगी

इस वास्ते कोई माँ की लोरियाँ भी लेके चलो

 

सफर की तारीख लगे कि बहुत लंबी है

तो महबूब की कोई तस्वीर ही लेके चलो

 

सफर बहुत कुछ मुकम्मल कर देगी

तुम निगाहों में ख़्वाब तो लेके चलो

 

सफर का जब अंतिम पड़ाव  आए तो

बिछड़ने से पहले सबको गले मिलाके चलो

 

सलिल सरोज

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