#Gazal by Salil Saroj

फिक्र ये है कि दंगों में मंदिर-मस्जिद का क्या होगा

उसका भी सोचो तो सारी रात खूँ में भींगता रहा होगा

 

अगर दहशतगर्द बता सकें तो आ के मुझे बताएँ

कि कितना खूँ हिन्दू और कितना मुस्लिम का बहा होगा

 

हाथों में तलवार और आँखों में खूँखार वहशत देखकर

ना जाने वो बच्चा कितनी बार या अल्लाह,हे राम कहा होगा

 

कुछ भी वक़्त नहीं लगा घर जलाने,बस्तियाँ उजाड़ने में

बेघर मज़लूम भूख की मार न जाने कैसे सहा होगा

 

आज जहाँ कब्रगाह और शमशान नज़र आते हैं

यकीनन यहाँ कभी इंसानों का भी रहना रहा होगा

 

सलिल सरोज

 

One thought on “#Gazal by Salil Saroj

  • July 10, 2018 at 6:06 am
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    so beautiful….salil ji

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