#Gazal by Salil Saroj

ना रास्ता चाहिए ना ही मंज़िल मुझे

मैं तो तेरे गेशुओं में सफर चाहता हूँ

 

जो खींच लाए तुझको मेरे दर तलक़

अपनी ग़ज़लों में वही असर चाहता हूँ

 

नहीं महफूज़ कोई और जगह जहाँ में

मैं तेरी उम्मीद निगाहों में बसर चाहता हूँ

 

न कोई गीता न ही कुरान चाहिए मुझको

तू मेरी साँसों में हो शामिल,मैं ये चाहता हूँ

 

कोई क्या कर सकेगा तुझसे इश्क़ मुझसा

मेरा कातिल भी तू हो,मैं ये चाहता हूँ

 

सलिल सरोज

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