#Gazal by Salil Saroj

मेरे दिल में नहीं तो ना सही

मेरी निगाहों में तो रहा कर

 

अगर मुस्कान की सूरत नहीं

तो आँसू ही बनके बहा कर

 

जरूरी नहीं हर राज़ कहना

कभी कुछ यूँ भी कहा कर

 

दवा नहीं मर्ज हर ज़ख़्म की

कुछ देर तो दर्द भी सहा कर

 

गर चाहता है मैं भी तुझे चाहूँ

तो बच्चों सा ही मुझे चाहा कर

 

सलिल सरोज

 

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