#Gazal by Salil Saroj

मुझे मत दिखा अभी ये चाँद सितारे
मैं किसी की निगाहों से अभी उबरा नहीं हूँ
जब से तुम्हारी निगाहों का सूरमा है मेरी आँखों में
तब से फिर खुद को मैने सँवारा  नहीं है
मत कर मुझे इतिहास में यूँ तो दफ़्न अभी
मैं पुराना लम्हा तो हूँ पर अभी गुज़रा नहीं हूँ
मुझ में मौजूद है मिठास इस बूढ़े  पेड़ की
जड़ से दूर तो हूँ पर डाली से बिछड़ा नहीं हूँ
शहर ने अपनी चकाचौंध से तुमको बेगाना कर दिया
मैं बेचारा बिछड़ा हुआ गाँव हूँ,पर उजड़ा नहीं हूँ
सलिल सरोज

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