#Gazal by Salil Saroj

गर हो आज तुम्हारी इजाज़त मुझे तो
आसमाँ पे तुम्हारी इबारत लिखना चाहता हूँ
तमाम दौलतें एक तरफ और तुम्हारी एक मुस्कान
मैं तुम्हारी मुस्कान पर भरे बाज़ार बिकना चाहता हूँ
रात की चादर हटे और तुम्हारा रूप खिले तब
मैं तुम्हारे माथे पर ओंस सा चमकना चाहता हूँ
कभी जुनून,कभी तिश्नगी,कभी आशना
तुम जैसा चाहो अब ,मैं वैसा दिखना चाहता हूँ
तुम बन जाओ बस मेरी आखिरी मंज़िल
मैं थक गया सफर से,अब रुकना चाहता हूँ
सलिल सरोज

Leave a Reply

Your email address will not be published.