#Gazal By Salil Saroj

रिश्ते निभाने में बहुत वक़्त लगता है
सो हर एक से ही फासला बनाते रहिए

कितनी तामील हो पाएगी,मलाल नहीं
आप तो रोज़ नया फैसला सुनाते रहिए

खुद ही कहिए और खुद ही सुना कीजिए
इस तरह अपना हौसला जुटाते रहिए

कभी घर के अन्दर,कभी घर के बाहर
अपनी हरकतों से मसला बढ़ाते रहिए

ज़मीनें बंजर हो गईं वायदों की बारिस से
माहौल तैयार है,असला गिराते रहिए

सलिल सरोज

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