#Gazal By Salil Saroj

कुछ प्यासी चिड़िया भी यहाँ आती हैं
अपनी छतों पे कुछ पानी भी भरके रखिए

ये बच्चे खिलौनों से कब तक खेल पाएँगे
तकियों में दादी नानी की कहानी भी भरके रखिए

अनुनय विनय से कुछ हासिल होगा नहीं
अपनी आवाज़ में थोड़ी जवानी भी भरके रखिए

इस तरह बेबा सा तो पेश न कीजिए
ज़मीन के आँचल में रंग धानी भी भरके रखिए

चलते फिरते गज़लें मुकम्मल नहीं हुआ करती
चंद शेरों में में ही सही, मानी भी भरके रखिए

सलिल सरोज

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