#Gazal By Salil Saroj

मैं न जाने ये किस शहर में आ गया हूँ
सच बोलके सबकी नजर में आ गया हूँ

यहाँ रात अभी और लंबी होनी थी शायद
लगता है मैं ही गलत पहर में आ गया हूँ

मेरी हस्ती अब किस कदर बच पाएगी
मैं खिले फूल सा सूखे शज़र में आ गया हूँ

सही और गलत का फर्क भी मालूम नहीं
लगता हैं मैं किसी की लहर में आ गया हूँ

सलिल सरोज

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