# Gazal by Salil Saroj

है नहीं यकीन तुमको है नहीं यकीन मुझको

फिर ये खत दर खत गुफ़्तगू क्या है ।।1।।

 

पा ही लिया होता सब जो तुमको पा लिया होता

वरना साँसों में  उभरता जुनूँ क्याहै ।।2।।

 

खुदाई से मिला पर खुदा ही कब मिला

किसे कहते हैं  और  ये शुकूँ क्या है ।।3।।

 

सब अमन है मुल्क में अखबार रोज़ कहता है

शफ़ाक़त के माथे पे स्याह गेशूं क्या है ।।4।।

 

कह गए महफिलों में सारी हसरतें यकीनन

पर ग़ज़ल का मक़सद और मौजूँ क्या है ।।5।।

 

सलिल सरोज

 

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