#Gazal by Sandeep Sharma Mahi

काफिया:- अर

रदीफ़:- है अभी

 

212 212 212 212

 

रुख हवा का भले ही उधर है अभी

पर सभी की नजर तो इधर है अभी

 

इस शहर में अजब शोर है झूठ का

है  परेशान सच यह खबर है अभी

 

मुफलिसी को नजर पर सजा लो कहीं

हर  तरफ  वायदों  का  कहर  है अभी

 

फल नहीं तो उसे पत्थरों की सजा

यह खिजां का पुराना शजर है अभी

 

राम रहमान का नाम बस जप यहाँ

इक यही जिंदगी की बहर है अभी

 

संदीप शर्मा “माही”

 

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